जब आप बैंक से लोन लेते हैं या पैसे बचत खाते में जमा करते हैं, तो बैंक आपको या आप बैंक से ब्याज प्राप्त करते हैं। ब्याज का मतलब है कि आपको या बैंक को अपनी राशि पर एक निर्धारित प्रतिशत के हिसाब से अतिरिक्त रकम मिलती है। यह रकम सालाना दर से तय होती है, लेकिन अगर आपको सिर्फ एक महीने का ब्याज निकालना हो तो इसे थोड़ा अलग तरीके से समझना पड़ता है।
Loan Interest on 1 Month
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि साल भर का ब्याज देने वाला प्रतिशत जब महीने के हिसाब से निकालना हो तो साल के 12 महीनों में बाँट दिया जाता है। मान लीजिए, अगर किसी राशि पर सालाना 12% ब्याज मिलता है, तो एक महीने में लगभग 1% ब्याज मिलेगा। इससे आपको अंदाजा हो जाता है कि आपकी राशि पर एक महीने में कितना ब्याज लगेगा।
यहाँ पर बात सिर्फ आसान तरीके से समझाने की है, इसलिए ज्यादा जटिल गणित में नहीं जाना है। मूल राशि, ब्याज दर और समय की अवधि को ध्यान में रखकर आसानी से एक महीने का ब्याज निकाल लिया जाता है। अगर आपने 10,000 रुपये का लोन लिया है और ब्याज दर 12% है, तो एक महीने का ब्याज लगभग 100 रुपये के आस-पास आएगा।
ध्यान देने वाली बात है कि कुछ मामलों में ब्याज की गणना साधारण तरीके से होती है और कुछ जगह कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) भी हो सकती है। आम तौर पर लोन पर साधारण ब्याज ही लागू होता है, जिससे हर महीने का ब्याज सीधे-सीधे पहले महीने के हिसाब से निकाला जाता है।
अगर आपके लोन में कोई अतिरिक्त शुल्क या अन्य नियम शामिल हैं, तो बैंक आपको उसकी जानकारी पहले ही दे देता है। इसलिए, ब्याज निकालते समय यह ध्यान रखें कि आपके समझ में सारे नियम साफ-साफ हों।
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1 महीने का ब्याज कैसे कैलकुलेट करें?
इस तरह, एक महीने का ब्याज निकालना मूल रूप से सालाना दर को 12 में बाँटने जैसा ही होता है। जितनी भी राशि पर लोन लिया है या जमा किया है, उसी के हिसाब से आपका एक महीने का ब्याज तय हो जाता है।
आम बोलचाल की भाषा में कहें तो, यदि आप साल भर के ब्याज को 12 हिस्सों में बाँट दें, तो हर महीने का हिस्सा आपके लिए एक महीने का ब्याज होगा। इसे समझने में ज्यादा उलझन नहीं है, बस ध्यान रहे कि हर बैंक या वित्तीय संस्था के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं।
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